जय संजू बाबा (आरती)
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा
टीआरपी के दाता, भाइयन के भ्राता

बंबई में तुम ब्लास्ट कराए
कीट-मकोड़े मार भगाए
एके छप्पन के तुम दाता
पास कोई फटक ना पाता
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
आर्थर रोड तुम्हारो डेरा
भाई सारे करें वहीं फेरा
यरवदा में जब तुम धाए
जेल चकाचक रौनक लाए
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
तुम्हरी छवि सिब्बलवा भाई
कॉग्रेस पार्टी बिछ-बिछ जाई
बहिन तुम्हारी संसद धाए
सोनिया गांधी को पाठ पढ़ाए
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
सकल टीआरपी तुमरे कारन
छूटे पीछे नाग अरु रावन
मीडिया तुमरे चरण को दासा
भाई लोग रहे नित पासा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
कोडासुर को सबक सिखाए
टाडा के सब चार्ज हटाए
आर्म्स एक्ट तुम्हारी माया
बढ़े चलो नरगिस के जाया
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
सत्य-अहिंसा मार भगाए
गांधी का नव-वर्ज़न लाए
टेरर को तुम दिए नव फेसा
रहे टापते पुलिस और केसा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
पवित्र भई यरवदा सारी
तर गए जेलासीन नर नारी
तेलगी और अबू सलेमा
तुम्हरे बल सब पाए नेमा
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
प्रात जो लेले नाम तुम्हारा
टीआरपी पाए दिन सारा
नेतागर्दी तुम्हीं करावो
वोटों के दाता
जय संजू बाबा, टैरर, जै संजू बाबा…
पाकिस्तान में बजे दुदुंभी
हिन्दुस्तान बने जलकुंभी
तुमसा नहीं एक्टर कोई दूजा
का करि सके करेक्टर लूजा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
अउर किरपा कछु कीजै बाबा
बंबई तो भई बीती बाता
सहस वक़ीलन की तुम माया
दाऊद के खासा
जय संजू बाबा, छप्पन, जै संजू बाबा…
रचयिता- ज्ञानेंद्रनाथ, सीनियर कॉपी एडीटर, इंडिया टीवी.
अवश्य पढ़े – संजूबाबा चरितलीला


अब वो तो चुनाव भी नहीं लड रहे … आरती काहे की।
जै हो..
जय हो… और भय हो का मिक्चर लगता है यह कविता पाठ
send
me ganpati samor aarti karto ki Munna Bhai la fhashi ho de, Niraprad mansacha tynech bale ghatla.
deepak
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
शानधारम्, जानदारम्
मस्त है!
बहुत बढ़िया….बधाई
नीरज भाई
बहुत सही.
अब जरा इसे गाकर (ढोल मजीरा न भी हो तो भी चलेगा) जरा पॉडकास्ट किया जाये, यह जनता की भारी मांग है.
जय हो!! जय हो!!
यह आरती पढ़ कर संजू बाबा जो अगली फिल्म बनाने वाले हैं उसमें आपको कोई ना कोई बड़ी जिम्मेदारी अवश्य देंगे।
शानदार,जानदार, मजेदार, धमाकेदार
गुरु चकाचकम्
औ ल्लाओ ऐसी कविता धकाधकम्
झकाझक पढ़बै करेंगे हम
आलोक पुराणिक
वाह, वाह गुरु, मन की बात आसान सी “आरती” मे कह गये… बहुत खूब..
सुन्दर ! हम तो नास्तिक से आस्तिक बन गए। ऐसे आजमाए हुए नुस्खे को हमें बताने के लिए धन्यवाद।
घुघूती बासूती
वाह जी वाह शानदार जानदर, ये कलम का सिपाही कही छुट्टियो मे कवियो के बीच फस गया लगता है..तभी तो दिनमे समाचारो मे गुण गाता है और सुबह शाम आरती..? धन्य हो लगता है,विधान परिषद या राज्यसभा के टिकट के जुगाड मे है..?